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इस पार्श्व गायिका के साथ होती थी लता जी की तुलना, आज पूरी संगीत की दुनिया उनके आगे करती हैं नतमस्तक

भारत की सबसे लोकप्रिय और अनमोल गायिका लता मंगेशकर करीबन तीस से ज्यादा भाषओं में फिल्मी औऱ गैर फिल्मी गानों को अपनी सुरीली आवाज दे चुकी हैं. लता जी आज भी अकेली हैं, जिन्होनें अपने को पूर्णरुप से संगीत को समर्पित कर रखा है.लेकिन उनकी पहचान भारतीय सिनेमा में एक पार्श्वगायक के रुप में रही हैं.वैसे लता की जादुई सुरीली आवाज के दिवाने भारत के साथ-साथ पूरी देश में हैं. शांत स्व भाव और प्रतिभा की धनी लता मंगेशकर को भारतीय क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर उन्हें अपनी मां मानते हैं.उनकी आवाज में इतना जादू हैं कि किसी को भी जीने का सहारा मिल जाए तो वहीं कभी-कभी उनकी आवाज में इतना दर्दे भरा हैं कि किसी कि आँखों से भी आँसू छलक जाएं.कहते हैं कामयाबी का रास्ता आसान नही होता हैं लता जी के जीवन पर भी ये लाइन सटीक बैठती हैं.

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दरअसल संगीत की दुनिया में अपना स्थान बनाने में उन्हें कई तरह की कठिनाइयों का सामना करना पड़ा.साल 1947 में आई फिल्म आप की सेवा में के लिए लता जी ने एक गाना गाया लेकिन किसी ने उन्हें नोटिस नही किया. सिर्फ इतना ही नही कुछ संगीतकारों ने तो उन्हें उनकी पतली आवाज की वजह से काम देने से मना कर दिया. दरअसल उस दौर में गायिका नूर जहान, शमशाद बेगम, जोह्नाभई, अम्बेवाली का दबदबा था औऱ तो और उस समय की प्रसिद्ध पार्श्व गायिका नूरजहाँ के साथ लता जी की तुलना की जाती थी.लेकिन साल 1949 में लता जी ने 4 हिट फिल्में बरसात,दुलारी,अंदाज व महल जैसी फिल्मों के लिए गाने गाए औऱ फिल्म महल का गाना आएगा आनेवाला सुपरडुपर हिट भी हुआ.लेकिन फिर लता जी ने कभी पीछे मुड़कर नही देखा औऱ धीरे-धीरे अपनी लगन और प्रतिभा के बल पर अपने पैर हिंदी सिनेमा में जमा लिए.लता जी की अद्भुत कामयाबी ने उन्हें फ़िल्मी जगत की सबसे मज़बूत महिला बना दिया था और आज पूरी संगीत की दुनिया उनके आगे नतमस्तहक है.

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