Monday, December 6, 2021
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युवा वर्ग के लिए मिसाल बन चुकी इन 5 महान हस्तियों पर भी बॉलीवुड में बननी चाहिए फिल्में

बॉलीवुड में आजकल महान हस्तियों पर जीवनी बनने का ट्रेंड चल रहा हैं लेकिन अब भी ऐसी कई महान हस्तियां हैं जिन्होनें भारत को आगे बढ़ाने के साथ-साथ एक नई उम्मीद औऱ प्रेरणा दी हैं.लेकिन अब देखना ये हैं कि बॉलीवुड इन महान हस्तियों पर कब फिल्म बनाती हैं.

abdul kalam
मिसाइल मैन ए पी जे अब्दुल कलाम – हमारा देश जिस तरह से हर अंतरिक्ष परियोजना में सफल हो रहा हैं उसका सारा श्रेय पूर्व राष्ट्रपति, भारत रत्न पाने वाले और मिसाइल मैन के रूप में अपनी पहचान बना चुके, डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम को जाता हैं. अब्दुल कलाम ने अपना सारा जीवन विज्ञानं की तरक्की के लिए समर्पित कर दिया.इसी के साथ-साथ उन्होनें अपने जीवन में कई सारी कठिनाइयों का सामना किया हैं.
Mother-Teresa
मदर टेरेसा – मदर टेरेसा एक ऐसी महान आत्मा थीं जिनका ह्रदय संसार के तमाम दीन-दरिद्र, बीमार, असहाय और गरीबों के लिए धड़कता था और इसी वजह से उन्होंने अपना सम्पूर्ण जीवन सेवा और भलाई में लगा दिया.भारत रत्न औऱ नोबेल शान्ति पुरस्कार से नवाजी जाने वाली मदर टेरेसा जैसी शख्सियत के ऊपर फिल्म जरुर बननी चाहिए.

dhirubhai large

धीरुबाई अंबानी – कुछ कहानियां असाधारण होती है, ऐसी ही कहानियों में एक नाम धीरूभाई अंबानी का भी है.भारत की सबसे बड़ी कपंनी रिलांयस इंडस्ट्री की नींव रखने वाले धीरुभाई अंबानी आज के युवावर्ग के लिए बहुत बड़ी प्रेणना हैं.हो ना हो पर संघर्ष औऱ द्ढ़ निष्ठा से अपने सपनों को आसमान तक पहुंचाने वाले इस शख्स पर फिल्म जरुर बननी चाहिए ताकि आज का युवा वर्ग फर्श से अर्श तक पहुंच पाएं.
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नरेंद्र मोदी – चाय बेचकर अपना गुजारा करने वाले हमारे देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी फिल्म बननी चाहिए.काफी संघर्ष औऱ चुनौतियों से भरा जीवन जीने के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने भारत जैसे देश में काफी बदलाव लाने की कोशिशकी हैं इसी के साथ-साथ विदेशों में भी अपनी एख अलग छाप छोड़ी हैं.
1200px Dr. Bhim Rao Ambedkar
बी आर अम्बेडकर – भारत में दलितों और पिछड़े वर्ग के लिए मसीहा के रूप में जाने वाले डॉ. भीमराव अम्बेडकर ने बहुत सारी परेशानियां झेलने के साथ-साथ अपनी निष्ठा दिखाते हुए दलित भाईयों औऱ बहनों को समाज में एक नया सम्मान दिलाया. दलित होने की वजह से सिर्फ इतना ही नही उन्हें स्कूल मे झाडू लगाने के साथ-साथ अलग भी बैठाया जाता था.

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